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मैं डॉक्टर परम आज अपनी कहानी अपनी जुबानी आप सबके निमित्त पेश कर रही हूं। संगरिया टिबी में बेटी, बहन, बुआ, मासी, डॉ परम, एमएलए परम नाम से आप जानते भी हो और पहचानते भी हो। बीसवीं सदी के साठ के दशक में संगरिया में जन्म लेकर मैं जयपुर मैं पढ़ लिखकर 1987 मैं एमबीबीएस डॉक्टर बनी, इसी वर्ष मेरी शादी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी श्री नवदीप सिंह सरां से हुई जो उस समय पुलिस अधीक्षक डूंगरपुर के पद पर तैनात थे व कालांतर से सराहनीय सेवा एवं विशिष्ट सेवा के राष्ट्रपति पदकों को प्राप्त कर राजस्थान के पुलिस महानिदेशक DGP के पद से रिटायर हुए व अब राजस्थान उच्च न्यायालय के पंजीबद्ध अधिवक्ता हैं। शादी के बाद भी पढ़ाई निरंतर जारी रखी, 1991 में एमडी मेडिसन की डिग्री हासिल की। परम पिता परमेश्वर ने मुझे एक पुत्र व एक पुत्री की दात प्रदान की। बेटा अमनजोत एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी होकर 2006 में अपने खेल में विश्व चैंपियन बन अमेरिका पढ़ने गया और वही टेक्स्स स्टेट में सेटल हो करके वह व उसकी पत्नी दोनों नामी-गिरामी, कामयाब व्यवसाई हैं। बेटी नमनज्योत अमेरिका में ही बोस्टन यूनिवर्सिटी में बायो-मेडिकल इंजीनियरिंग की तालीम हासिल कर रही है। दोनों बच्चों को संस्कारी, लायक और अच्छे नागरिक होने के गुण डाले हैं।1987 से जन सेवा में मेरी रुचि होने की वजह से मैंने निशुल्क चिकित्सा परामर्श देना शुरू किया व पढ़ाई के साथ-साथ निशुल्क मेडिकल कैंप लगाने का कार्य भी जारी रखा।


1995 में जयपुर में मैंने राजपूताना हॉस्पिटल के नाम से अपना हस्पताल खोला, जिसकी करीब डेढ़ दर्जन सैटेलाइट शाखा जयपुर शहर के इर्द-गिर्द सभी महत्वपूर्ण छोटे कस्बों में स्थापित कर, मेहनत से हासिल किए ज्ञान की वजह से, हाथ में परमात्मा की कृपा से शफा होने की वजह से, सेवा की लगन की वजह से; जयपुर व जयपुर के इर्द-गिर्द सैकड़ों निशुल्क चिकित्सा सेवा कैंप किए व ऊपर वाले की बख्शीश से छोटी उम्र में ही बहुत ख्याति अर्जित की, जिसके सदके 1998 में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी जी ने मुझे कांग्रेश में सम्मिलित किया व जनसेवा का मौका भी दिया। मैं कांग्रेस की सेवा करते हुए विभिन्न राज्यों में कांग्रेस के प्रचार प्रसार व कांग्रेश को जिताने की मुहिम में शामिल रही, व राजस्थान में सन 2005-2011 लगातार 6 साल प्रदेश कांग्रेश की प्रवक्ता भी रही। इसी का सदका मैं लगातार 1998 से संगरिया ਟਿब्बी की जनता से भी निरंतर संपर्क में भी रही व उनके दुख सुख में साथ निभाने का बीड़ा उठाया। जो आज दिन तक जारी है। आपकी सेवा का यह संतोष ही सही अर्थों में मेरी खुशी का मुख्य स्रोत है।

यह तो आप सब जानते ही हैं कि मैं रतनपुरा में जन्मे सरदार सुरजीत सिंह सिद्धू व दीनगढ़ में जन्मी माता पाल कार की बेटी हूं जिन्होंने अति गरीब परिवार में जन्म लेने के बाद अपनी मेहनत के सदका अपनी गरीबी को शिकस्त दी, राजस्थान के एक अग्रणी व्यवसाई होकर उभरे और हजारों की तादाद में नौजवानों को अपने साथ जोड़ा, नौकरियां दी, उनके भविष्य को संवारा, अच्छे समाज गसेवी नागरिक के रूप में अपनी जीवन यात्रा पूरी की। गरीबी, लाचारी, बेबसी को हराते हुए उन्होंने जिंदगी में यह मुकाम हासिल कर अपने इलाके को, अपनी मातृभूमि को गौरवान्वित किया। जनसेवा में खुद को न्योछावर करने की भावना मैंने मेरे माता-पिता से हासिल की, काम के प्रति दृढ़ता व कभी हार ना मानने की भावना मेरे पति से हासिल की, मातृभूमि के कदमों में अपनी पूरी जिंदगानी.. तन मन धन अर्पित करने की भावना मुझे ऊपर वाले ने बक्शी और इसमें समय-समय आपके प्यार ने और इजाफा किया और सुदृढ़ता प्रदान की !

साल 2008 में आपके प्यार, आपके अपनेपन, आपके वोट, आपके सपोर्ट ने मुझे जिता कर राजस्थान विधानसभा भेजा। आपकी प्रेरणा स्वरूप मुझे संगरिया टिबी में अनेकों अनेक विकास के कार्य करने का मौका मिला, जैसे कि पुरानी मौरूसी भूमि से रास्ता पाने का कानूनी हक दिलाना, संगरिया व टिब्बी दोनों की अलग-अलग पंचायत समितियां स्थापित करना, ढाबां व तलवाड़ा को उप तहसील बनवाना, घग्गर नदी के ऊपर संगरिया व टिब्बी को जोड़ता यातायात का पुल बनवाना, मसानी का पुल निर्माण कराना, संगरिया शहर में रेलवे फाटक का फ्लाईओवर बनवाना, दीनगढ़ व सुरेवाला में आई टीआई स्थापित करवाना, सभी पंचायतों में 12वीं कक्षा तक के स्कूल क्रमोन्नत करवाना, संगरिया शहर में सीवरेज सिस्टम की स्वीकृति दिलाना, तलवाड़ा में पुलिस थाना; मालारामपुरा व बशीर में पुलिस चौकी की स्थापना करवाना, सभी पंचायत स्तर पर राजीव गांधी सेवा केंद्र स्थापित करवाना, रसोई गैस एजेंसीआं स्थापित करवाना, टिब्बी में 132 केवी ग्रिड सब स्टेशन की स्वीकृति व ग्राम संतपुरा, पन्नीवाली,नाईवाला किकरवाली, शेरेखां, शेरगढ़ व कुलचंद्र में 33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन की स्वीकृति दिलाना, पेयजल की सुविधा के लिए विभिन्न गांवों ढाणियों कस्बों में पाइप लाइन, डिग्गी, फिल्टर, उच्च जलाशय, डीसीबी, हैंडपंप आदि पेयजल सुविधाओं की स्वीकृति दिलाना, न्यू खारा सिस्टम पर लिफ्ट पंप स्थापित करना, कच्चे खालों को पक्का करने के लिए 450 करोड़ के कार्य करवाना, 100 करोड रुपए की लागत से संगरिया टिब्बी में सड़कों का निर्माण, चौड़ाइकरण, मरम्मत करवाना; सिंचाई की सुविधाओं के विस्तार के लिए करीब डेढ़ सौ करोड़ की योजनाएं प्रस्तावित करवाना, संगरिया टिब्बी में पक्की सड़कों का जाल विछवाना, इलाके में गैस एजेंसीओं की स्थापना, रेलवे अंडर ब्रिज की स्वीकृति, मीरा कॉलेज का सरकारीकरण, बालिकाओं के लिए हॉस्टल आदि अनेकों अनेक कामों को मैंने अत्यंत लगन निष्ठा, सेवा की भावना से अंजाम दिया। जिसकी मीठी यादें आपके जेहन में आज तक बनी हुई हैं। जिसका सदका आपका अगाध प्रेम मुझे अब भी उतने ही गाड़ेपन से हासिल हो रहा है जैसा तब हासिल था जब मैं इस इलाके की एमएलए रही पिछले 10 सालों से विकास की यात्रा धाम की गई है मेरे सम्माननीय संत के मेरे संगरिया टीबी मेरी जनता मेरे संगरिया टीवी मेरी जनता मेरे सम्माननीय एक चौराहे पर खड़े हैं यहां मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं उनको विकास के पद पर आगे ले जाते हुए उनके जीवन में सार्थक परिवर्तन ला सकूं इसके लिए मैंने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का बीड़ा उठाया है यह पर यह कदम मैं आप सबके साइन और आपके वोट और सपोर्ट को अपना मन कर उठाया है अपना मन कर उठाया है आपने ही।

पिछले 10 सालों से विकास की यात्रा थम सी गई है; मेरे संगरिया टिबी, मेरी जनता, मेरे सम्माननीय एक चौराहे पर खड़े हैं। यहां मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं उनको विकास के पथ पर आगे ले जाते हुए उनके जीवन में सार्थक परिवर्तन ला सकूं। इसके लिए मैंने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का बीड़ा उठाया है। पर यह कदम मैंने आप सबके स्नेह और आपके वोट और सपोर्ट को अपना मान कर उठाया है। आपने ही मुझे इस लायक बनाया कि मैं आपकी सेवा में विकास के नए सोपान संगरिया टिबी में स्थापित कर सकूं; उसी तरह, उसी लगन, उसी भावना के साथ मैं फिर इस इलाके की सेवा में अपना पूरा वजूद लेकर हाजिर हूं। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि जिस तरह से आप ने 2008 में मुझे जिताकर राजस्थान विधानसभा भिजवाया उसी तरह उससे भी दुगने उत्साह के साथ आप मुझे दोबारा विधानसभा जयपुर भिजवाएंगे ताकि हम सब मिलकर अपने इलाके को आगे बढ़ा सकें और एक मिसाल के रूप में विकास के नए मील पत्थर कायम कर सकें। कहो दिल से डॉक्टर परम फिर से।आओ मिलकर आगे बढ़ें। मीलों हम आ गए हैं मीलों हमें और आगे जाना है.. आओ साथ चलें।

जय संगरिया जय टिब्बी

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